Tuesday, 2 August 2022

पहचान

माया अपने पोस्टल ऑफिस में काम करती थी. वह एक 55 वर्षीय महिला थी. काफी हद तक उबाऊ और बेजान जीवन व्यतीत कर रही थी.माया मैडम का घर का वातावरण अच्छा नहीं था. उनके पति शराबी थे. जैसे तैसे रुपए जोड़ जोड़ कर माया मैडम ने अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई पूरी करवाई थी और अब दोनों बच्चे जॉब की तलाश में थे. माया मैडम की जिम्मेदारियां अभी भी खत्म नहीं हुई थी.

 उसके पोस्टल ऑफिस मे जब रिक्तियां भरी जाने को हुई तो वहां साक्षात्कार हुए. साक्षात्कार में कुछ लोगों का चयन हुआ. उनमें एक लड़की का भी चयन हुआ जोकि उम्र में माया की उम्र की लगभग आधी से भी कम थी.

 लड़की का नाम साशा था. वह बहुत ही हंसमुख और मिलनसार लड़की थी. जॉब के पहले ही सप्ताह में वह सभी से बहुत घुल मिल गई. साशा को दूसरा डिपार्टमेंट मिला था लेकिन बातचीत होने के चलते उसकी माया मैडम से खूब बनने लगी थी. माया मैडम भी उससे बात करके बहुत हल्का महसूस करती थी. साशा जब भी माया मैडम को उदास देखती तो उनसे मजाक में कहती क्या माया मैडम कभी हंस भी लिया करो इस बात पर माया मैडम मुस्कुरा देती. 

 पोस्टल ऑफिस काफी राजनीति से भरा पड़ा था . हर कोई अपने प्रमोशन और सैलरी बढ़वाने के लिए दूसरे को दबाने और गिराने की कोशिश में लगा रहता था. पोस्टल ऑफिस के स्टाफ के लोग साशा को देखकर यह सोचते थे कि कही इसे प्रमोशन ना मिल जाए. उन्होंने माया मैडम को साशा के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया. वे कहते थे माया मेम यह लड़की बहुत बदतमीज है आप इससे इतनी बड़ी है लेकिन यह हमेशा आपको माया मैम कहकर ही बुलाती है. माया मैडम पर उन लोगों की बातों का असर होने लगा. माया मैडम थोड़ी कटी कटी रहने लगी थी. 

 साशा ने अपनी पढ़ाई के चलते नौकरी छोड़ने का मन बना लिया था . उसने अपना रिजाइन ऑफिस में जमा करा दिया था. और वह उस दिन अपना सामान समेटकर जब केबिन से बाहर निकली तो उसे माया मैडम दिखाई दी. साशा उनके सामने जाकर खड़ी हुई और कहा- माया मैडम कभी हंस भी लिया करो माया मैडम मुझे पता है आपको मेरे द्वारा नाम से पुकारा जाना पसंद नहीं है लेकिन आपको पता है आपका नाम आपकी पहचान है किसी की पत्नी या किसी की मां कहलाने से बेहतर होता है अपनी खुद की पहचान होना. अपनी पहचान मत खोने दीजिएगा. यह कहकर साशा मुस्कुराते हुए बाहर चली गई और माया मैडम उस से एकटक जाते हुए देख रही थी और सोच रही थी आज उसे एक बच्ची जीने की राह दिखाकर गई है.

Monday, 6 June 2022

Indecent proposal

आजकल एक परेशानी बहुत झेलने को मिल रही है

आपको एफबी पर एकदम से बहुत सारी फ्रेंड रिक्वेस्ट आना शुरू हो जाती है.

जोकि ज्यादातर ऐसे लोगों होती है जोकि उसी एरिया या सिटी के हो.

वे आपसे बार-बार मैसेज कर उसका रिप्लाई मांगते है

या फिर खुद को आपकी किसी दूर की दोस्त का दोस्त बताते है और आपसे रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करवा  लेते है.


अब  जैसे जैसे समय: बीतने लगता है आपका इनबॉक्स इनके गुड मॉर्निंग एंड गुड इवनिंग से भरणे  लगता है. 

कभी कभी हाउ आर यू से बातें  शुरू होती है. फिर सामने से कभी जोक्स तो कभी memes आना शुरू हो जाते है और  हम यह समझ नहीं पाते है कि यह कुछ गलत होने जा रहा है.

हम इन सब को बहुत हल्के में लेते हैं लेकिन कुछ दिन में सामने से मिलने और बात करने की बातें होने लगती है. और वे बार-बार आपसे आपके कांटेक्ट नंबर देने के लिए कहने लगते हैं.  साथ ही किसी " स्पेसिफिक प्लेस" पर मिलने के लिए कहने लगते हैं. आज आप समझ सकते हैं की  कि इनके मस्तिष्क में इंटरनेट से डाउनलोड की गई अपशिष्ट भरी होती है.


अगर आप सभ्य समाज से बिलॉन्ग करते हैं तो आप को समझ में आता है कि वह व्यक्ति कितनी गलत सोच रखे हुए  है. 

 

परंतु इन सब कारणों के चलते आपकी छवि धूमिल होने लगती है. क्योंकि आपकी ना सुनने के बाद वे आपकी छवि सोशल मीडिया पर बिगाड़ने लगते हैं और ना चाहते हुए भी आप कुछ गलत किए बगैर इन सब में पड़ जाते हैं.


सोशल मीडिया बनाया इसके लिए गया है कि हम खुद को नए समाज से संयोजित रख सके . 





लेकिन कुछ लोग फेसबुक और सोशल मीडिया को नया tinder समझ बैठे है और लोगों को यूज एंड थ्रो सामान समझ बैठे हैं. 


सोशल मीडिया पर माना कि कई लोग जीवन साथी ढूंढ लेते है जोकि बिल्कुल भी गलत नहीं है, लेकिन इसे अपना हुक अप पॉइंट समझ लेना बर्दाश्त के बाहर है.


तो कृपा करके किसी " लड़की" या लड़के को इस  trap मे फसाना बंद करें.

अगर आप जेनुइनली दोस्त बनना चाहे तो ही एफबी रिक्वेस्ट भेजें अन्यथा साइबर रिपोर्ट करके आप पर 

क़ानूनी  कार्यवाही की जा सकती है.  



https://www.infosecawareness.in/concept/cyber-laws-in-india/women#:~:text=Section%2066E%20of%20the%20IT,years%2C%20and%2For%20fine.