आंखों में तेरी जो इतने सवाल हैं
क्या जाने यह मेरे ख्याल हैं
हर बार नए नए लगते हैं
यह तेरे चेहरे के जो हाल है
तुझे रोक कर पूछ भी न सकूं
मन में हां मलाल है
तू अभी रुखसती पर है
रास्ते का तू बवाल है
अगली बार मिलकर जरूर पूछूंगी
मेरा अपना ही ख्याल है
उसी रास्ते पर उसी मोड़ पर
जहां छोड़े तूने अपने सवाल हैं
ठहर जाना अगर मन में आए तो
मेरा मन भी तेरी ही तरह थोड़ा तो कंगाल है
कुछ प्रश्न तुम्हारे अधूरे कुछ अधूरे ही
मेरे जवाब ए सवाल हैं
बेचैनी की लकीरें सर पर
कदमों में बेबाकी की ताल है
गुजर जाता है हर दफा नजदीक से
ओ रब तू तो और कमाल है

