Saturday, 8 February 2025

A LETTER TO EMPLOYERS

 : by the employees 



We are not saying that we need all luxury but in remuneration we need our sweat given money as remuneration. 



Whenever we ask for a job it doesn't mean that we need a luxurious job where we can sit on the sofa and chit chat about our personal life.

 

We need a job so we can stand on our feet and so we can Buy a roof for our head , buy food for our family's stomach. 


We don't say that we don't want to work just want to say that give us work which is legitimate and where we can upskill ourself 


Indian government also made act about fair remuneration where an employer can make an employee work 45 hours in a week but in private sector companies the employers make their employees were for more than 10 hours everyday which is not legitimate at all.


We are not beggars we just want fair remuneration with fair working hours and work ethics. 


Government of India also decided minimum remuneration for the fresher employees at 14000.


But private sector companies all ways ignore this. Why all time they force US to work under there policy and neglect our needs.


Thursday, 15 August 2024

Tum door shehar ke

Aaj tumhari baton se pta chalaa Ki tum mujhe koi tohfa Dena chahte ho Mujhse tum bate ghuma ke puchh rahe the Ki mujhe kya kya pasand he Chalo btati hu aaj Waha ke harsingar ki khushboo lete aana Jis bagh me subeh beth baten ki thi , wahan ka sukoon lete aana, Or un galiyaron ki subah ki thandak bhi lete aana Chori chori Jo us ped ke dalon se anjeer todi thi uski mithas b lete aana Or wo jo tumhare pados se jo phool us din toda tha , uska rang bhi lete aana Arzoo ki kalam se

Tuesday, 2 August 2022

पहचान

माया अपने पोस्टल ऑफिस में काम करती थी. वह एक 55 वर्षीय महिला थी. काफी हद तक उबाऊ और बेजान जीवन व्यतीत कर रही थी.माया मैडम का घर का वातावरण अच्छा नहीं था. उनके पति शराबी थे. जैसे तैसे रुपए जोड़ जोड़ कर माया मैडम ने अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई पूरी करवाई थी और अब दोनों बच्चे जॉब की तलाश में थे. माया मैडम की जिम्मेदारियां अभी भी खत्म नहीं हुई थी.

 उसके पोस्टल ऑफिस मे जब रिक्तियां भरी जाने को हुई तो वहां साक्षात्कार हुए. साक्षात्कार में कुछ लोगों का चयन हुआ. उनमें एक लड़की का भी चयन हुआ जोकि उम्र में माया की उम्र की लगभग आधी से भी कम थी.

 लड़की का नाम साशा था. वह बहुत ही हंसमुख और मिलनसार लड़की थी. जॉब के पहले ही सप्ताह में वह सभी से बहुत घुल मिल गई. साशा को दूसरा डिपार्टमेंट मिला था लेकिन बातचीत होने के चलते उसकी माया मैडम से खूब बनने लगी थी. माया मैडम भी उससे बात करके बहुत हल्का महसूस करती थी. साशा जब भी माया मैडम को उदास देखती तो उनसे मजाक में कहती क्या माया मैडम कभी हंस भी लिया करो इस बात पर माया मैडम मुस्कुरा देती. 

 पोस्टल ऑफिस काफी राजनीति से भरा पड़ा था . हर कोई अपने प्रमोशन और सैलरी बढ़वाने के लिए दूसरे को दबाने और गिराने की कोशिश में लगा रहता था. पोस्टल ऑफिस के स्टाफ के लोग साशा को देखकर यह सोचते थे कि कही इसे प्रमोशन ना मिल जाए. उन्होंने माया मैडम को साशा के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया. वे कहते थे माया मेम यह लड़की बहुत बदतमीज है आप इससे इतनी बड़ी है लेकिन यह हमेशा आपको माया मैम कहकर ही बुलाती है. माया मैडम पर उन लोगों की बातों का असर होने लगा. माया मैडम थोड़ी कटी कटी रहने लगी थी. 

 साशा ने अपनी पढ़ाई के चलते नौकरी छोड़ने का मन बना लिया था . उसने अपना रिजाइन ऑफिस में जमा करा दिया था. और वह उस दिन अपना सामान समेटकर जब केबिन से बाहर निकली तो उसे माया मैडम दिखाई दी. साशा उनके सामने जाकर खड़ी हुई और कहा- माया मैडम कभी हंस भी लिया करो माया मैडम मुझे पता है आपको मेरे द्वारा नाम से पुकारा जाना पसंद नहीं है लेकिन आपको पता है आपका नाम आपकी पहचान है किसी की पत्नी या किसी की मां कहलाने से बेहतर होता है अपनी खुद की पहचान होना. अपनी पहचान मत खोने दीजिएगा. यह कहकर साशा मुस्कुराते हुए बाहर चली गई और माया मैडम उस से एकटक जाते हुए देख रही थी और सोच रही थी आज उसे एक बच्ची जीने की राह दिखाकर गई है.

Monday, 6 June 2022

Indecent proposal

आजकल एक परेशानी बहुत झेलने को मिल रही है

आपको एफबी पर एकदम से बहुत सारी फ्रेंड रिक्वेस्ट आना शुरू हो जाती है.

जोकि ज्यादातर ऐसे लोगों होती है जोकि उसी एरिया या सिटी के हो.

वे आपसे बार-बार मैसेज कर उसका रिप्लाई मांगते है

या फिर खुद को आपकी किसी दूर की दोस्त का दोस्त बताते है और आपसे रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करवा  लेते है.


अब  जैसे जैसे समय: बीतने लगता है आपका इनबॉक्स इनके गुड मॉर्निंग एंड गुड इवनिंग से भरणे  लगता है. 

कभी कभी हाउ आर यू से बातें  शुरू होती है. फिर सामने से कभी जोक्स तो कभी memes आना शुरू हो जाते है और  हम यह समझ नहीं पाते है कि यह कुछ गलत होने जा रहा है.

हम इन सब को बहुत हल्के में लेते हैं लेकिन कुछ दिन में सामने से मिलने और बात करने की बातें होने लगती है. और वे बार-बार आपसे आपके कांटेक्ट नंबर देने के लिए कहने लगते हैं.  साथ ही किसी " स्पेसिफिक प्लेस" पर मिलने के लिए कहने लगते हैं. आज आप समझ सकते हैं की  कि इनके मस्तिष्क में इंटरनेट से डाउनलोड की गई अपशिष्ट भरी होती है.


अगर आप सभ्य समाज से बिलॉन्ग करते हैं तो आप को समझ में आता है कि वह व्यक्ति कितनी गलत सोच रखे हुए  है. 

 

परंतु इन सब कारणों के चलते आपकी छवि धूमिल होने लगती है. क्योंकि आपकी ना सुनने के बाद वे आपकी छवि सोशल मीडिया पर बिगाड़ने लगते हैं और ना चाहते हुए भी आप कुछ गलत किए बगैर इन सब में पड़ जाते हैं.


सोशल मीडिया बनाया इसके लिए गया है कि हम खुद को नए समाज से संयोजित रख सके . 





लेकिन कुछ लोग फेसबुक और सोशल मीडिया को नया tinder समझ बैठे है और लोगों को यूज एंड थ्रो सामान समझ बैठे हैं. 


सोशल मीडिया पर माना कि कई लोग जीवन साथी ढूंढ लेते है जोकि बिल्कुल भी गलत नहीं है, लेकिन इसे अपना हुक अप पॉइंट समझ लेना बर्दाश्त के बाहर है.


तो कृपा करके किसी " लड़की" या लड़के को इस  trap मे फसाना बंद करें.

अगर आप जेनुइनली दोस्त बनना चाहे तो ही एफबी रिक्वेस्ट भेजें अन्यथा साइबर रिपोर्ट करके आप पर 

क़ानूनी  कार्यवाही की जा सकती है.  



https://www.infosecawareness.in/concept/cyber-laws-in-india/women#:~:text=Section%2066E%20of%20the%20IT,years%2C%20and%2For%20fine.



Monday, 6 December 2021

सवाल

 आंखों में तेरी जो इतने सवाल हैं

क्या जाने यह मेरे ख्याल हैं

हर बार नए नए लगते हैं

यह तेरे चेहरे के जो हाल है


तुझे रोक कर पूछ भी न सकूं

मन में हां मलाल है

तू अभी रुखसती पर है 

रास्ते का तू बवाल है


अगली बार मिलकर जरूर पूछूंगी

मेरा अपना ही ख्याल है

उसी रास्ते पर उसी मोड़ पर 

जहां छोड़े तूने अपने सवाल हैं



ठहर जाना अगर मन में आए तो

मेरा मन भी तेरी ही तरह थोड़ा तो कंगाल है

कुछ प्रश्न तुम्हारे अधूरे कुछ अधूरे ही 

मेरे जवाब ए सवाल हैं


बेचैनी की लकीरें सर पर

कदमों में बेबाकी की ताल है

गुजर जाता है हर दफा नजदीक से 

ओ रब तू तो और कमाल है

खुद की

 दुनिया की भीड़ में खुद को खोना नहीं चाहती,

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती.


रह गई हूं पीछे बहुत ज़माने से

पर थकी नहीं हूं खुद को आजमाने से


लाख बुराई मुझ में है पर कुछ अच्छाई जिंदा है

मैं अभी जिंदा हूं इस बात को अपनाती हूं


आसमान में जितने बादल

शायद उतनी मुझ में बुराई होगी

पर खुदा ने मुझको संभाला है

मुझ में कुछ तो अच्छाई होगी


दुनिया की भीड़ में खुद को खोना नहीं चाहती,

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती.


रह गई हूं पीछे बहुत ज़माने से

पर थकी नहीं हूं खुद को आजमाने से


लाख बुराई मुझ में है पर कुछ अच्छाई जिंदा है

मैं अभी जिंदा हूं इस बात को अपनाती हूं


आसमान में जितने बादल

शायद उतनी मुझ में बुराई होगी

पर खुदा ने मुझको संभाला है

मुझ में कुछ तो अच्छाई होगी


समय गलत है या गलत मैं

यह मैं सोचना नहीं चाहती

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती


किसी को खुश करके खुद को दुखी करना

यह कौन सा रिवाज है

हर कोई खुश होके भी खुद से नाराज है


कोई सब कुछ पाके भी खुद में अकेला है

कोई कंगाल हो कर भी खुशियों से खेला है


मैं यह नहीं कहती के इच्छाएं रखना

गुनाह है

पर उम्मीद से ज्यादा इच्छा रखना गुनाह है


उन्माद में जीने वाले खुद को भगवान समझते हैं

दूसरों को अपनी नजरों में नीचे रखते हैं


काफिरों की जिंदगी जीने का कोई हल नहीं

मेहनत के बिना बनते महल नहीं


समय गलत है या गलत मैं

यह मैं सोचना नहीं चाहती

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती




Here's to a new beginning

 he was so depressed  cause he failed 23rd time  in job interview . his blood red face was fully covered with sweat and tears, handing the result ,he was thinking about poison or hanging. 

suddenly the bell rang, he was so lost in thinking that he couldn't hear the bell at once. 


when he realised that someone is at the door ,next moment he stood and went to the stairs. 

his foot stuck in the carpet.

he was in such a hurry that he lost balance.  

 the right knee touched the first step of stairs,then left elbow smashed with stairs railing and in the end  he felt unconscious with head covered with blood.


(after some hours)

"he saw shalini crying on his left side. all relatives  were gathered in his dining hall.

tanu anty saying , that it is so young age to die , what will happen to her after him."


i raised my lashes, and realised it was a dream.


 i am in a general ward, feet  are alright , elbow is broken, head is covered with bandages.


"i survived an accident!!!!  and i am still alive!?????"


shalini is sitting on left chair and watching me with her swollen eyes. 

she started, you know i never loved you for your looks and bright future, but because of your loving heart. next time if you struggle, i will struggle with you. it was the first confession of love, she ever made.


he smiled with sparkling eyes and thought , "here's to a new beginning!"