Monday, 6 December 2021

खुद की

 दुनिया की भीड़ में खुद को खोना नहीं चाहती,

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती.


रह गई हूं पीछे बहुत ज़माने से

पर थकी नहीं हूं खुद को आजमाने से


लाख बुराई मुझ में है पर कुछ अच्छाई जिंदा है

मैं अभी जिंदा हूं इस बात को अपनाती हूं


आसमान में जितने बादल

शायद उतनी मुझ में बुराई होगी

पर खुदा ने मुझको संभाला है

मुझ में कुछ तो अच्छाई होगी


दुनिया की भीड़ में खुद को खोना नहीं चाहती,

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती.


रह गई हूं पीछे बहुत ज़माने से

पर थकी नहीं हूं खुद को आजमाने से


लाख बुराई मुझ में है पर कुछ अच्छाई जिंदा है

मैं अभी जिंदा हूं इस बात को अपनाती हूं


आसमान में जितने बादल

शायद उतनी मुझ में बुराई होगी

पर खुदा ने मुझको संभाला है

मुझ में कुछ तो अच्छाई होगी


समय गलत है या गलत मैं

यह मैं सोचना नहीं चाहती

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती


किसी को खुश करके खुद को दुखी करना

यह कौन सा रिवाज है

हर कोई खुश होके भी खुद से नाराज है


कोई सब कुछ पाके भी खुद में अकेला है

कोई कंगाल हो कर भी खुशियों से खेला है


मैं यह नहीं कहती के इच्छाएं रखना

गुनाह है

पर उम्मीद से ज्यादा इच्छा रखना गुनाह है


उन्माद में जीने वाले खुद को भगवान समझते हैं

दूसरों को अपनी नजरों में नीचे रखते हैं


काफिरों की जिंदगी जीने का कोई हल नहीं

मेहनत के बिना बनते महल नहीं


समय गलत है या गलत मैं

यह मैं सोचना नहीं चाहती

मैं खुद की हूं किसी और की होना नहीं चाहती




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